पेंशन औऱ रेलवे विभाग के द्वारा मिलने वाले सरकारी फंड के इंतजार में पीड़िता,गुजर गये 36 साल

Sara Samay News

सारा समय मीडिया
रायबरेली ।पेंशन औऱ रेलवे विभाग के द्वारा मिलने वाले सरकारी फंड का पीड़ित परिवार पिछले 36 साल से इंतजार करने के लिए मजबूर है।पूरा मामला राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली जिले के ऊँचाहर कोतवाली क्षेत्र के बाबा के पुरवा गांव का है।जहां की रहने वाली तारावती नाम की महिला आज भी मुफलिसी में अपने परिवार के साथ जीवन जीने के लिए मजबूर है।
दरअसल आपको बता दे कि गाँव की रहने वाली तारावती नाम की।महिला ने बताया कि उसके पिता श्रीनाथ और माता विमला देवी दोनों दिल्ली के शहदरा में रेलवे कर्मचारी के पद पर कार्यरत रहे।पीड़िता का कहना है कि पिता रेलवे।में गैंगमैन के पद पर और माता चौकीदार के पद पर कार्यरत रही।वही श्रीनाथ की 1990 में ड्यूटी के दौरान स्वास्थ्य खराब हुआ।और उनकी इलाज के दौरान मौत हो गई।जिसके बाद पीड़िता की मां पति के देहांत के बाद बीमार रहने लगी और उन्होंने एक वर्ष के बाद अपनी नौकरी से इस्तीफा देकर अपनी दोनों बेटियों कमला देवी और तारावती को लेकर ऊंचाहार के बाबा के पुरवा चली आई।तारावती का कहना है कि जिस वक्त उसके पिता की मौत हुई।उस वक्त दोनों बहन नाबालिग थी।इसलिए म्रतक आश्रित में नौकरी भी रेलवे विभाग ने नही दी।बालिग होने के बाद भी उन्हें विभाग ने नौकरी।नही दी।जिसके बाद पीड़ित परिवार मुफलिसी और गरीबी में जीवन जीने के लिए मजबूर होने लगा।
और उसके बाद उन्होंने रेलवे विभाग से मांग की ।की उन्हें उनके पति श्रीनाथ की मौत के बाद मिलने वाली पेंशन औऱ अपनी नौकरी में मिलने वाले फंड की बात की।जिसपर 1995 में रेलवे विभाग।के कहने पर केनरा बैंक में ही खाता खुलवाया गया।और कहा गया।कि इसी में पेंशन आ जायेगी।लेकिन रेलवे के द्वारा कोई भी मदद नही मिली।जिसके बाद पीड़ित परिवार ने 2016 में हाईकोर्ट में शरण ली।2025 में पीड़ित परिवार को न्यायालय से राहत मिली और रेलवे विभाग को आदेशित किया गया कि श्रीनाथ की मौत होने से जो भी फंड बनता है।उसे पीड़ित परिवार को दिया जाए।लेकिन न्यायालय के आदेश के बाद भी रेलवे के अधिकारियों ने ध्यान नही दिया।जिसके बाद पीड़ित परिवार आज भी रेलवे विभाग से उम्मीद लगाए बैठे है।कि शायद उन्हें न्यायालय के।आदेश पर विभाग उनके पिता की पेंशन बहाल कर दे।लेकिन ऐसा नही हो रहा है।वही महिला ने रेलवे अधिकारियों पर आरोप भी लगाया कि कोर्ट के आदेश पर जब वह दिल्ली के कश्मीरी गेट रेलवे अधिकारियों से मिलने गई तो उससे टोकन मनी की बात कही गई।पीड़िता का कहना है कि वह 10 लाख रुपये कहाँ से लेकर आये। खेत भी नही की उन्हें बेच कर अधिकारियों का पेट भर दे ताकि पिता की मौत के बाद मिलने वाली पेंशन और फंड का कुछ हिस्सा मिल जाये।जिससे जीवन के बचे दिन अच्छे से गुजर सके।

error: Content is protected !!